जिसमें शिशु का जन्म प्राकृतिक तरीके से महिला की योनि से होता है।
आमतौर पर इसमें किसी डॉक्टर, हॉस्पिटल या ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ती है ।
लेकिन सिजेरियन डिलीवरी यानी की ऑपरेशन में इन सबकी जरूरत पड़ती है।
कैसे जाने कि बच्चा पैदा होने वाला है?
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ये संकेत मिलें तो समझ लें, बस 24 से 48 घंटे में ही शुरू होने वाला...
पेशाब बार-बार आना डिलीवरी के लिए बच्चे का सिर नीचे योनि की ओर आ जाता है। ...
म्यूकस प्लग निकलना प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भाशय ग्रीवा में
म्यूकस प्लग बनता है। ...
कमर दर्द तेज हो जाना ...
पानी की थैली फटना
_कैसे पता चलता है कि बच्चेदानी का मुंह खुला हुआ है?
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बच्चेदानी का मुंह खुलने से पहले म्यूकस प्लग निकलता है।
प्लग के बाहर आने पर आपको म्यूकस डिस्चार्ज होता है।
इसके बाद बार-बार डिस्चार्ज होता है
और गर्भाशय ग्रीवा नया प्लग बनाने की कोशिश करती है।
म्यूकस प्लग निकलने का मतलब है कि कुछ ही घंटों में डिलीवरी होने वाली है।
बच्चेदानी का मुंह जल्दी खोलने के लिए क्या खाएं?
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नौवें महीने में खजूर खाने से भी बच्चेदानी का मुंह खुलने में मदद मिलती है।
इसके लिए एक गिलास दूध गर्म होने के लिए रख दें
और उसमें तीन से चार खजूर डालें।
दूध को अच्छी तरह से उबालें
और फिर छानकर पी लें।
इसके अलाावा नौवें महीने में दूध में घी डालकर पीने से भी बच्चेदानी का मुंह टाइम पर खुलने में मदद मिलती है।
क्या सीढ़ियां चढ़ने से नॉर्मल डिलीवरी में मदद मिलती है?
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सीढ़ी चढ़ने के कारण आगे-पीछे होने वाली असमान झुकाव गति भी बच्चे को हिलने और घूमने में मदद करती है।
यदि संभव और सुरक्षित हो, तो एक बार में दो सीढ़ियाँ चढ़ें।
हिप सर्कल/बॉल पर रॉकिंग - व्यायाम/योग/बर्थ बॉल पर बैठना अक्सर प्रसव के दौरान अद्भुत लगता है।
क्या प्रेगनेंसी में सीढ़ी चढ़ना चाहिए?
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क्या गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में सीढ़ियां चढ़ना सुरक्षित है? वास्तव में। हालांकि जब तक आपकी गर्भावस्था में कोई जटिलता नहीं है, आपको पूरी प्रेगनेंसी में सीढी चढ़ना चाहिए ।
नॉर्मल डिलीवरी के बाद महिला कई हफ्तों या महिनों तक अपने शारीरिक और आवाजिक स्वास्थ्य को पूर्णतः वापस पाती है। यह स्थायी नहीं होता क्योंकि हर महिला की शारीरिक स्थिति और डिलीवरी के पश्चात्तापमान विभिन्न हो सकते हैं।
सामान्य रूप से, महिला डिलीवरी के बाद 6 से 8 सप्ताह के दौरान अपने पूर्वधान्य स्वास्थ्य को पुनर्निर्मित करती है, लेकिन यह समय स्थायी नहीं होता। यह भी इस पर निर्भर करता है कि डिलीवरी के बाद किस प्रकार की चिकित्सा दी गई है, कितनी कठिन डिलीवरी थी, और आपकी स्वास्थ्य और जीवनशैली पर कैसे प्रभाव पड़ा है।
महिलाओं को डॉक्टर की सलाह पर अपने पूर्वधान्य स्वास्थ्य को फिर से पाने और अपने शारीरिक स्वास्थ्य को पूर्णतः वापस पाने में मदद मिलती है।
नॉर्मल डिलीवरी एक सामान्य प्रक्रिया है और अधिकांश स्थितियों में मां और शिशु के लिए सुरक्षित होती है, यदि वह सही तरीके से और मेडिकल प्रोफेशनल्स की निगरानी में हो। नॉर्मल डिलीवरी के कुछ मुख्य फायदे होते हैं:
आपके बच्चे के लिए कम चांस चोट का: जब मां द्वारा प्राकृतिक रूप से डिलीवरी होती है, तो बच्चे को जन्म से जुआँ करने का चांस कम होता है।
मां के शारीरिक आवाजिक स्वास्थ्य का बेहतरीन होना: नॉर्मल डिलीवरी में मां के शारीरिक आवाजिक स्वास्थ्य को कम आघात पहुंचता है और उसके आराम से वापसी होती है।
प्राकृतिक आराम से बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग का आरंभ करने का अवसर: नॉर्मल डिलीवरी के बाद मां और बच्चे के बीच स्किन-टू-स्किन संपर्क करने का अवसर होता है, जो ब्रेस्टफीडिंग का आरंभ करने में मदद करता है.
हालांकि नॉर्मल डिलीवरी सुरक्षित हो सकती है, लेकिन कुछ मामलों में यह संभावना है कि डॉक्टर्स के साथ सार्थक चर्चा करें और वे सही और सुरक्षित डिलीवरी का फैसला करें। डॉक्टर्स आपके स्वास्थ्य, गर्भ की स्थिति, और अन्य मांगों का ध्यान रखकर निर्णय लेंगे।
नॉर्मल डिलीवरी में बच्चे का सर चपटा होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
नॉर्मल डिलीवरी की प्रक्रिया: नॉर्मल डिलीवरी में, बच्चा मां के गर्भाशय से जन्म लेता है, जिसके दौरान उसके सिर में दबाव पड़ता है, जिससे बच्चे के सिर का आकार असमय कम हो सकता है।