प्रेग्नेंट होने के बाद प्रसव तक आपको पीरियड्स नहीं होते हैं और न ही होने चाहिए।
कुछ महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान योनि से रक्तस्राव होता है।
उनमें से कुछ में यह इस प्रकार होता है कि उन्हें यह उनकी नियमित माहवारी की तरह लगता है।
लेकिन गर्भावस्था के दौरान योनि से किसी भी प्रकार का रक्तस्राव, मासिक धर्म नहीं होता।
जब महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान यूट्राइन ब्लीडिंग होती है तो यह पीरियड्स की वजह से नहीं होगा।
प्रेगनेंट होने पर ओवुलेशन नहीं होता है और न ही पीरियड आते हैं।
हालांकि, ये डिलीवरी के तुरंत बाद ओवुलेट करना शुरू कर सकती हैं।
इसलिए डॉक्टर स्तनपान करवाने वाली महिला के प्रेगनेंसी न चाहने पर किसी न किसी गर्भ निरोधक के इस्तेमाल की सलाह दे सकते हैं।
मासिक चक्र प्रेगनेंसी के लिए ही होता है
और इसका चक्र पीरियड के पहले दिन से शुरू होता है और अगले पीरियड के पहले दिन पर खत्म होता है।
जब ओवरी एग रिलीज करती है तो इस साइकिल के बीच में ओवुलेशन होता है।
ओवुलेट करने के बाद लगभग 12 से 24 घंटे तक एग मौजूद रहता है।
यदि स्पर्म कोशिका ओवरी में मौजूद रहे और एग को फर्टिलाइज कर दे तो एग तो अपने आप ही गर्भाशय में इंप्लांट हो जाता है और प्रेगनेंसी शुरू होती है।
इस प्रक्रिया में एग के फर्टिलाइज न होने पर मासिक चक्र शुरू होता है और शरीर यूट्राइन लाइनिंग को गिरा देता है।
गर्भवती महिला को पीरियड्स नहीं आते हैं,
लेकिन फिर भी उन्हें हल्की ब्लीडिंग हो सकती है।
ऐसा जरूरी नहीं है कि प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग किसी दिक्कत का संकेत हो।
आपको प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग का कारण पता करके डॉक्टर से इस बारे में बात करनी चाहिए।
प्रेगनेंसी की पहली तिमाही
गर्भावस्था की पहली तिमाही में ब्लीडिंग होने की संभावना ज्यादा होती है।
गर्भाशय में प्लेसेंटा के इंप्लांट होने पर हल्की स्पॉटिंग हो सकती है।
गर्भावस्था के दौरान सर्विकल कोशिकाओं में बदलाव भी महसूस हो सकता है जिसकी वजह से हल्की ब्लीडिंग हो सकती है,
खासतौर पर सेक्स के बाद।
पहली तिमाही में ब्लीडिंग होने के अन्य कारणों में एक्टोपिक प्रेगनेंसी, संक्रमण, मिसकैरेज, सबकोरिओनिक हैमरेज (जिसमें यूट्राइन की दीवार और प्लेसेंटा के बीच में ब्लीडिंग होती है), जेस्टेशनल ट्रोफोब्लास्टिक डिजीज शामिल हैं।